शहर के एक बड़े व्यापारी ने गाँव में नया बंगला बनाया
गृहप्रवेश पर उसने पूरे गाँव को दावत पर बुलाया.
वह हर किसी को अपना महँगा फ़र्निचर, विदेशी झूमर और आलीशान कमरे दिखा रहा था.
तभी उसकी नजर बाहर बैठे एक बूढ़े किसान पर पड़ी, जो चुपचाप बैठा मुस्कुरा रहा था.
व्यापारी ने उससे पूछा- “ काका ! कैसा लगा मेरा मकान.?”
“ मकान तो बहुत खूबसूरत है, लेकिन इसमें एक चीज की कमी रह गई है.”
व्यापारी ने जी खोलकर पैसा लगाया था मकान बनाने में.एक से एक बढ़कर चीजें लगी थीं मकान में. वह सोच में पड़ गया था कि आखिर क्या कमी रह गई है मकान में. उसने आश्चर्यचकित होते हुए जानना चाहा कि इस आलीशान मकान में कौन-सी कमी रह गई है.?
किसान ने मुस्कुराते हुए कहा-“ भैयाजी, मकान तो आपने बड़ा खूबसूरत बनाया है, लेकिन हम पड़ौसियों के लिए आपने खुला आँगन नहीं छोड़ा.
बात सच थी. व्यापारी पहली बार अपने ही मकान में खुद को छोटा महसूस करने लगा था.