‘एक लड़का परीक्षा में कम नंबर आने पर उदास बैठा था. उसने गुस्से में अपनी पेंसिल तोड़ दी.
दादाजी ने टूटी हुई पेंसिल को उठाते हुए उससे जानना चाहा-“ क्या अब यह बिलकुल ही बेकार हो गई है.”
लड़के ने कहा-“ हाँ, यह टूट गई है. किसी काम की नहीं रही.”
दादा ने पेंसिल छीलकर उसका नुकिला हिस्सा निकालते हुए कहा-“ देखो, यह अभी भी लिख सकती है.”
फ़िर उन्होंने कहा-“ बेट, जीवन में असफ़लताएँ हमें तोड़तीजरूर हैं. लेकिन यदि हम हिम्मत न हारें तो फ़िर से नए सिरे से लिख सकते हैं.
लड़के ने मुस्कुराते हुए अपनी किताब खोली और पढ़ने बैठा गया.