दादा के निधन के बाद उनकी वसीयत खोली गई.
उसमें लिखा था-“ मेरी सारी संपत्ति उस पोते को मिलेगी, जो मेरे सबसे कीमती सामान को पहचान ले.”
सबने तिजोरी, जमीन के कागजाद और गहने ढूँढने शुरु किए.
सबसे छोटा पोता चुपचाप उठा. दादा के कमरे में गया और उनका पुराना चश्मा उठा लाया.
लोग हँसने लगे.
तभी वकील बोला- “ बधाई हो बेटा, ये सारी संपत्ति तुम्हारी है.”
सब चौंक गए.
वकील ने वसीयत का आखिरी वाक्य पढ़ा-“ जिसे मेरे चश्में की कीमत समझ आ जाए,
वही समझेगा कि मैंनेपूरी जिन्दगी दुनिया को किस नजर से देखा था.”